कांगड़ा किला – हिमाचल प्रदेश

 

मेरे पिछले ब्लॉगों में आपने पढ़ा कि कैसे हमने डलहौजी-बादलों के शहर की यात्रा का आनंद लिया और फिर कैसे हम खजियार- भारत के मिनी स्विट्जरलैंड की सुंदरता से मुग्ध हो गए। 

 

खजियार- भारत का  मिनी स्विट्जरलैंड

 

 

मेरे जोत पास वाले  ब्लॉग में आपने पढ़ा कि कैसे हम कांगड़ा किले तक पहुँचने के लिए जोत पास से गुज़रे और उसके बाद हमने श्री ब्रजेश्वरी  माता मंदिर के दर्शन किए।

 

You can check my previous blogs by clicking on the link

Dalhousie- A town in clouds – Day 6

 

जोत पास

 

मेरे कई पाठकों ने मुझे मैसेज किया और अनुरोध किया, कि मुझे कांगड़ा किले पर विस्तार से लिखना चाहिए था, उन्होंने महसूस किया कि मुझे किले के बारे में चित्र और विस्तृत जानकारी देनी चाहिए थी। मुझे लगा कि यह बहुत ही उचित अनुरोध है क्योंकि कांगड़ा किला वास्तव में अपने आप में पूर्ण ब्लॉग के लिए योग्य है, इसलिए अब मैं यह पूरा ब्लॉग केवल कांगड़ा किले पर लिख रहा हूं।

 

 

 

मै अब अपनी यात्रा फिर से  आरंभ करता हु ,जहां से मैंने अपने अंतिम ब्लॉग में छोड़ा था:

सुबह 11.30 बजे जब हम कांगड़ा किला पहुँचे। सूर्य चिलचिलाती गर्मी का उत्सर्जन कर रहा था और मैं  पसीने से तरबतर हो रहा था। (अरे पसीना पोंछू  की फोटो निकालु कुछ समझ  ही नहीं आ रहा था ) लेकिन फिर जब आप अपने सामने एक विशाल किले को देखते हैं तो चीजें और परिप्रेक्ष्य बदलने में समय नहीं लगता । 

 

किले मेरी कमजोरी

 

मेरे अधिकांश पाठक जानते हैं कि किले मेरी कमजोरी हैं। (कभी भी बोलो कोइ किला देखना है तो  मैं  आधी  रात को भी चलने को तैयार हूँ  … बस शर्त यह कि  वह किला  हॉन्टेड नहीं होना चाहिये )। इसलिए मैं महान कांगड़ा किले को देख़ने के लिए उत्साहित था। कांगड़ा किले के बारे में मैंने नेट पर कहीं पढ़ा था कि एक पहाड़ी कहावत है कि जो भी कांगड़ा किले पर जीत अर्जित करता है, वोह पर्वत को धारण करता है, ऐसा कांगड़ा और आसपास के क्षेत्र में इस किले का महत्व था। (तो बॉस बनता  है ना एक पूरा मलाई  मार के  मसालेदार ब्लॉग इस किले पर)

 

तो बॉस बनता  है ना एक पूरा मलाई  मार के  मसालेदार ब्लॉग इस किले पर

 

कांगड़ा किला  

यह किला न केवल सबसे पुराने किलो   में से एक है (महाभारत में इसका संदर्भ था) बल्कि यह भारत के 10 सबसे बड़े किलों में से भी एक  है। (मुझे लगता है कि यह सूची में 8 वें स्थान पर है)। यह ऐतिहासिक किला दो नदियों मांझी और बाणगंगा के संगम पर, धर्मशाला के पास कांगड़ा घाटी में स्थित है।

कांगड़ा किला कई आक्रमणों का गवाह रहा है और इसे जीतने के लिए कई रक्तपात हुए हैं। लेकिन विडंबना देखिए कि भले ही इस किले पर विभिन्न सेनाओं द्वारा इतने सारे आक्रमण होने  के बावज़ूद भी इस किले के विनाश का कारण दुश्मनों को आक्रमण नहीं था .. वह प्रकृति थी!

हाँ यह एक भूकंप था, जिसने 1905 में इस किले को नष्ट कर दिया था।

ऐतिहासिक कांगड़ा किला दो नदियों मांझी और बाणगंगा के संगम पर है

 

इतिहास के शौकीनों के लिए हम कांगड़ा किले के संबंध में कुछ ऐतिहासिक तथ्यों पर ध्यान  देते है । ये प्रसिद्ध स्थल  धर्मशाला से सिर्फ 20 किलोमीटर दूर स्थित यह कांगड़ा किला है। इस किले का निर्माण शाही राजपूत परिवार द्वारा किया गया था। कटोच राजवंश, जिसके मूल का पता मूल त्रिगर्त साम्राज्य से लगाया जा सकता है, जिसका उल्लेख महाभारत महाकाव्य में मिलता है। 

 

कांगड़ा किला

 

कांगड़ा किला लगभग 4 शताब्दी ईसा पूर्व का है। यह हिमालय के सबसे बड़े किले के रूप में जाना जाता है और निम्लिखित आप  इस किले पर किए गए कुछ महत्वपूर्ण आक्रमणों की सूची देखें: 

 

1009- महमूद गजनी

1320- फिरोज शाह तुगलक

1540- शेरशाह सूरी

1556- सम्राट अकबर 

1620- सम्राट जहाँगीर

यह किला अंत तक  ब्रिटिश सैनिको के कब्ज़े में था  जब तक कि यह भूकंप से नष्ट नहीं हो गया।

 

मैं इस किले पर लंबे इतिहास के पाठ से आपको बोर नहीं करूंगा। हालाँकि अगर आपकी इतिहास को लेकर गहरी दिलचस्पी है तो आप  Google पर जांच कर सकते हैं।

 

 

तो दोस्तों चलिए अब मैं आपको कांगड़ा किले की सैर पर ले जाता हूँ। हमने अपनी कार पार्क की, और किले के टिकट काउंटर पर गए जहाँ हमने प्रवेश टिकट खरीदा जो कि 150 / – रुपये प्रति व्यक्ति था। टिकट काउंटर पर  एक आदमी नहीं था, मैंने मन में सोचा चलो अच्छा है किले  में भीड़  कम मिलेगी तो फोटो निकलने में आसानी होगी ,  हमने एक लोहे के गेट से परिसर में प्रवेश किया और अपने दाईं ओर एक छोटे से पानी के पूल को देखा, हालांकि पानी साफ नहीं था लेकिन फिर भी पानी का नजारा हमेशा सुखद रहता है खास करके ऐसी चिल चिलाती  गर्मी में   यहां से कुछ आगे छोटा सा हरा भरा बगीचा है जो दखने में  साफ और स्वच्छ था।

 

पानी का नजारा हमेशा सुखद रहता है

 

हम यहां से आगे बढ़े और हमें किले का एक विशाल प्रवेश द्वार दिखाई देता है । पहले गेट को रणजीत सिंह गेट भी कहा जाता है, इस गेट में प्रवेश करने पर तुरंत एक और गेट मिलता है।

 

 

पुराने दिनों में इन द्वारों ने आक्रमणों के दौरान किले की रक्षा करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। थोड़ा आगे चलने पर एक और द्वार है (मुझे बताया गया था कि किले में 11 द्वार हैं) और इस द्वार से एक लंबे पत्थर की सीढ़ियाँ ऊपर की ओर जाती हैं…।

 

 

 

मेरे दोस्त एक लंबी चढ़ाई के लिए तैयार हो जाओ ! ये पत्थर की सीढ़ियाँ 200-300 के बीच कहीं भी हो सकती हैं, ईमानदारी से बोलो तो मैंने  गिनती नहीं की थी  (अरे यार हमको फोटो  लेने से फुर्सत नहीं होती , तो गिनती कौन  और कब करेगा ?

 

ये पत्थर की सीढ़ियाँ 200-300 के बीच कहीं भी हो सकती हैं

 

इन सीढ़ियों पर चढ़ने के बाद हम यू टर्न कॉर्नर पर पहुँचते हैं और हमें एक और गेट दिखाई देता है, जिसे जहाँगीर गेट नाम दिया गया था। 

 

जहाँगीर गेट

 

हम इस गेट से गुजरते हैं और पहली  लैंडिंग तक पहुँचते हैं।

 

पहली लैंडिंग

 

 

 इस समय तक मेरी बेटी और पत्नी गर्मी के कारण थक गए थे, इसलिए वे एक बेंच पर बैठ गए और थोड़ी देर आराम किया उन्होंने किले की दीवारों की प्राचीर पर चित्रों को क्लिक करके इस विराम का अच्छा उपयोग किया। (मैं  न कहता था कि  हम लोग कोई  भी मौका  नहीं छोड़ते  फोटो खींचने का। ) 

 

 

किले की ऊँची दीवारे , एक नज़र ऊपर से

 

हम यहाँ से थोड़ा और आगे बढ़ गए और एक विशाल प्रांगण में पहुँच गए, 

 

किले का एक विशाल आंगन

 

आँगन के बाईं ओर कुछ खंडहर थे, वे शायद उस समय के सैनिक क्वार्टर हो सकते हैं।

 

सैनिक क्वार्टर हो सकते हैं।

 

 उसके बगल में अंबिका मंदिर था और मंदिर के बगल से एक और पत्थर की सीढ़ियाँ ऊपर जाती हैं। हालाँकि जो मेरी नज़र में आया वह था यह खूबसूरत विशाल जैन मंदिर। इस पर बहुत सारी नक्काशी है जो लगभग हर जैन मंदिर का हिस्सा होती हैं । जैन मंदिर काफी चौड़ा और ऊँचा है। कुछ पलों के लिए मैं इस खूबसूरत मंदिर से अपनी आँखें नहीं हटा सका। 

 

खण्डार सा एक पुराना पर सुन्दर जैन मंदिर

 

हम आंगन से महल तक जाने वाली सीढ़ियों पर चढ़ गए। जब हम सीढ़ियों पर चढ़े और नीचे देखा तो हमने महसूस किया कि यह किला वास्तव में बुरी तरह से नष्ट हो गया था और अधिकांश संरचनाएँ खंडहर की स्थिति में थीं। मैं वास्तव में दुःख महसूस कर रहा था और सोच रहा था कि यह जगह उन दिनों की गतिविधियों से कैसे गुलजार होगी। कैसे सिपाही किले  की ऊँची दीवारों से दुश्मन पर  नज़र रखते होंगे? किलों  में घूमने का यह ही तो एक आनंद है कि  आप एक अलग युग में चले जाते हो अपनी  कल्पना माध्यम से।  

 

अम्बिका मंदिर और जैन बीच से ऊपर जाती हुई सीढ़ियों

 

यहाँ से ऊपर चढ़ने के दौरान हम एक और पत्थर की सीढ़ियों को रहस्यमय तरीके से ऊपर जाते हुए देखते हैं, मुझे इस तरह के अनुभव बहुत पसंद हैं, आप वास्तव में यह महसूस करते हैं कि आप किसी ऐतिहासिक स्थान पर हैं। एक रोमांच का एहसास होता हैं।  

 

 पत्थर की सीढ़ियों को रहस्यमय तरीके से ऊपर जाते हुए देखते हैं

 

इन सीढ़ियों से चढ़कर हम किले की सबसे ऊँची जगह पर पहुँचे।हालांकि यहां देखने के लिए बहुत कुछ नहीं है लेकिन रेलिंग से  आसपास के दृश्य अति  लुभावने लगते  और जब किसी दिन  आसमान साफ होता है तो धौलाधार रेंज के बर्फ से लदे पहाड़ों की चोटियों को भी देखा जा सकता है।

 

 

 किले की  रेलिंग से  आसपास के दृश्य अति  लुभावने लगते

 

हमने चित्रों को क्लिक करने में कुछ समय बिताया, वास्तव में मैं थोड़ा ओर समय यहाँ  बिताना चाहता था, लेकिन फिर याद आया  कि  अभी  बहुत सी जगहें थीं, जिन्हें हमें देखना था। एक बात सुनिश्चित है कि अगली बार मैं निश्चित रूप से कांगड़ा के लिए एक पूरा दिन रखूंगा,

 याद है न मैंने क्या कहा था। ..क़िले  मेरी कमज़ोरी हैं !

मेरे ब्लॉग को पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। अगर आपको मेरे ब्लॉग पसंद आते हैं तो कृपया उन्हें अपने दोस्तों के साथ साझा करें, कृपया आप  मेरी साइट को Subscribe करे  और आपकी टिप्पणी बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए ब्लॉग पर टिप्पणी ज़रूर  करें।

 

 

Spread the Travel Bug:
Total Page Visits: 589 - Today Page Visits: 28

admin - Author

You Might Also Like

Comments ( 2 )

  • Darshan kaur

    हिंदी आपकी बहुत ही अच्छी हैं।आगे से हिंदी में ही ब्लॉग लिखियेगा।

    • admin

      Thank you ji, Koshish chalu hai

Enter Your Comments Here..